भूतिया ट्रेन
https://youtu.be/2fzi9pQcQEI?si=aNSzudhzrlhvc0B4यह कहानी एक छोटे से गांव के पास की है, जहाँ एक पुरानी रेलवे लाइन गुजरती थी। इस रेलवे लाइन पर अब ट्रेनें नहीं चलती थीं, लेकिन गांव वालों का कहना था कि हर अमावस्या की रात एक ट्रेन उस पटरी पर दौड़ती है। इसे "भूतिया ट्रेन" कहा जाता था अजय, जो शहर से अपने गांव छुट्टियों में आया था, इन कहानियों को मजाक समझता था। उसने गांव वालों की बातों को हंसी में उड़ा दिया और तय किया कि वह इस ट्रेन की सच्चाई जानकर रहेगा। अमावस्या की रात, अजय अपने दोस्त राकेश के साथ रेलवे लाइन पर गया। चारों तरफ घना अंधेरा था, और हवा में अजीब सी सर्दी थी। दोनों ने टॉर्च और कैमरा साथ लिया था। रात के करीब 12 बजे, उन्हें दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी। अजय और राकेश ने इसे पहले भ्रम समझा, लेकिन जैसे-जैसे आवाज करीब आती गई, उन्हें पटरी पर एक ट्रेन की झलक दिखाई दी। ट्रेन की बत्तियाँ धुंधली थीं और उसमें से हल्की-हल्की रोशनी निकल रही थी। जब ट्रेन पास आई, तो दोनों ने देखा कि उसमें कोई यात्री नहीं था। केवल खिड़कियों से झाँकती परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं। ट्रेन की गति धीमी थी, लेकिन उसमें से आती आवाजें डरावनी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई मदद के लिए पुकार रहा हो। अजय ने हिम्मत कर ट्रेन के पास जाने का फैसला किया। जैसे ही वह ट्रेन के करीब पहुँचा, उसने देखा कि ट्रेन के डिब्बों पर खून के निशान थे। अचानक, एक डिब्बे की खिड़की से एक हाथ बाहर आया और अजय को खींचने की कोशिश करने लगा। राकेश ने उसे खींचकर बचाया और दोनों वहां से भागे।
भागते-भागते अजय और राकेश ने महसूस किया कि पीछे से ट्रेन की आवाजें और तेज होती जा रही थीं। जब उन्होंने मुड़कर देखा, तो पाया कि ट्रेन की खिड़कियों से लाल रोशनी निकल रही थी और उसमें से कई परछाइयाँ उन्हें देख रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वे दोनों का पीछा कर रही हों। किसी तरह गांव पहुंचने के बाद, दोनों ने राहत की सांस ली। लेकिन जब उन्होंने अपने कैमरे की जांच की, तो उसमें कुछ भी रिकॉर्ड नहीं हुआ था। सिर्फ एक तस्वीर दिखाई दी जिसमें एक धुंधली परछाई खड़ी थी। यह देखकर अजय और राकेश और भी डर गए।
अगले दिन, गांव के बुजुर्गों ने उन्हें बताया कि कई साल पहले उस ट्रेन में आग लग गई थी, जिसमें सैकड़ों यात्री जलकर मर गए थे। ट्रेन में मौजूद लोगों की आत्माएँ अब भी उस हादसे की याद में भटकती हैं। तब से, हर अमावस्या की रात वह ट्रेन उसी पटरी पर दौड़ती है।
अजय और राकेश ने उस दिन के बाद कभी उस रेलवे लाइन के पास जाने की हिम्मत नहीं की। लेकिन अजय के मन में सवाल थे। उसने सोचा, "क्या यह ट्रेन वास्तव में आत्माओं की दुनिया से आती है, या यह किसी और रहस्य का हिस्सा है?" कुछ हफ्तों बाद, अजय ने उस घटना पर शोध करना शुरू किया। उसने पाया कि ट्रेन का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था और इसे "रेड लाइन एक्सप्रेस" कहा जाता था। उस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों का मानना था कि यह ट्रेन कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचती। हादसे वाली रात भी ट्रेन रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी और फिर कभी नहीं देखी गई।
इन सब जानकारियों के बावजूद, अजय के सवाल खत्म नहीं हुए। वह सोचता रहा कि उस रात उसने जो देखा, वह हकीकत थी या किसी प्रेतात्मा की चाल। उस रात की यादें और डर अजय और राकेश के दिलों में हमेशा के लिए बस गए। लेकिन अब, अजय के मन में एक नई जिज्ञासा जाग गई थी - क्या वह इस रहस्य को सुलझा पाएगा, या यह भूतिया ट्रेन हमेशा एक पहेली बनी रहेगी?